सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले टिकैत

‘ज़िला प्रशासन को और लखनऊ में बैठे जो उच्च अधिकारी थी उनको इस बात का पूरा यकीन था कि अगर इस मुद्दे को कोई हल करा सकता है तो वो राकेश टिकैत ही करा सकते हैं। किसी और पॉलिटकल पार्टी को या पॉलिटिकल नेता को शामिल नहीं करना चाहते थे। तो उनके लिए राकेश टिकैत ही एक रास्ता थे।’

लखीमपुर खीरी मामले में राकेश टिकैत कैसे बने सरकार के संकटमोचक? इस बारे में ये कहना है नदीम का, जो नवभारत टाइम्स में नैशनल पॉलिटकल एडिटर हैं।
आज है गुरुवार, 7 अक्टूबर और आप सुन रहे हैं डेली न्यूज़कास्ट। पूरी बात सुनते हैं कुछ देर में, उससे पहले एक नज़र इस वक्त की बड़ी ख़बरों पर :

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