देश में अपनी तरह की पहली योजना, रात में भी फैलेगी सूरज की ‘रोशनी’

नीचे खेती और ऊपर बिजली उत्पादन को लेकर दिल्ली सरकार की महत्वाकांक्षी योजना शिलान्यास के करीब तीन महीने बाद अब मूर्त रूप लेने को तैयार है। सूरज की रोशनी की मदद से अन्नदाताओं की झोली भरने के उद्देश्य को ध्यान में रखकर बनी मुख्यमंत्री कृषि आय बढ़ोतरी सौर योजना का पहला प्रायोगिक संयंत्र उजवा स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में अब बनकर तैयार है। संयंत्र में अब केवल बिजली के मीटर लगाने का कार्य शेष है।

सबकुछ सही रहा तो आगामी सप्ताह में यहां सूरज की रोशनी से रातें जगमग होंगी। दिन में भी इस संयंत्र से हासिल होने वाली ऊर्जा से यहां सभी जरूरी कामकाज हो सकेंगे। यह योजना न सिर्फ दिल्ली, बल्कि देश में अपनी तरह की पहली योजना है। बिहार के पूसा व राजस्थान के जोधपुर में इस तरह की सीमित कोशिश हुई, लेकिन दिल्ली में जिस बड़े पैमाने पर यह योजना लागू होगी वह अपने आप में अलग है। 

दूर- दूर से पहुंच रहे किसान 

संयंत्र की पहली झलक देखने को दिल्ली देहात के विभिन्न गांवों से बड़ी तादाद में किसान उजवा पहुंच रहे हैं। यहां के विज्ञानियों का कहना है कि जब से इस योजना के बारे में किसानों को पता चला तब से ही उनके यहां रोजाना बड़ी संख्या में फोन आने लगे। फोन पर सभी किसानों को योजना के बारे में समझाया जाता था, लेकिन उनके कई सवाल ऐसे होते थे, जिन्हें आप तब तक नहीं समझा सकते जब तक कि वे संयंत्र को प्रत्यक्ष तौर पर नहीं देख लेते। अब जिन किसानों का फोन आता है, उन्हें विज्ञानी यहां आकर संयंत्र देखने की सलाह दे रहे हैं।

विज्ञानियों का कहना है कि योजना के तहत यह दिल्ली में लगा पहला संयंत्र हैं। इसे यहां स्थापित करने का उद्देश्य किसानों को इसके बारे में पूरी जानकारी देना है ताकि वे इस योजना से खुद को जोड़ सकें। दिल्ली सरकार इस योजना को बड़े पैमाने पर लागू करने की बात कह चुकी है। इस योजना को प्रमुख रूप से दिल्ली के ग्रीन बेल्ट वाले गांवों में लागू करने की बात कही गई है, लेकिन यह तभी संभव है जब किसान इस योजना से खुद को जोड़ें।

तब आय हो जाएगी दोगुनी

अभी एक एकड़ में किसान गेहूं या धान की खेती करते हैं तो उससे करीब 50 से 60 हजार रुपये की आय होती है। इसमें जोखिम भी रहता है। इस योजना में कोई जोखिम नहीं है। सबसे बड़ी बात यह है कि ऊपर सोलर पैनल लगे होने के बावजूद किसान जमीन पर खेती कर सकेंगे। हां, धान या गेहूं जैसे पैदावार किसान भले ही न ले सकें, लेकिन वैज्ञानिक किसान को उन तकनीक के बारे में जानकारी व प्रशिक्षण देंगे जिससे वे छायादार जगहों पर बागवानी के सहारे खेतीबाड़ी कर सकेंगे।

इससे मिलने वाली आय किसानों के लिए अतिरिक्त आय होगी। योजना के तहत किसानों की जमीन 25 वर्षों के लिए पट्टे पर ली जाएगी। खेत के ऊपरी हिस्से पर सोलर पैनल लगाए जाएंगे। एक एकड़ खेत में करीब 110 किलोवाट बिजली रोजाना पैदा होगी। बिजली कंपनी इस बिजली को खरीदेगी। किसानों से जो जमीन ली जाएगी उसके एवज में करीब 80 से 90 हजार रुपये प्रति वर्ष का भुगतान किसान को किया जाएगा।

संयंत्र बनकर तैयार है। कनेक्शन से जुड़े थोड़े कार्य शेष रह गए हैं, जिसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। फिलहाल बड़ी संख्या में किसान यहां संयंत्र की पहली झलक देखने पहुंच रहे हैं।

Show More

Related Articles

Back to top button